सीवरेज और नहर की बदहाली पर सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश वैष्णव का कठोर संदेश, नगर निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल
पाली में गंदगी के खिलाफ अनोखा ग्राउंड रिपोर्ट
पाली शहर में सीवरेज और गंदगी की समस्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हालांकि, इस बार वजह सिर्फ बदहाल नहर नहीं, बल्कि उसके खिलाफ शुरू हुआ एक अनोखा और झकझोर देने वाला विरोध है। सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश वैष्णव ने प्रशासन की अनदेखी से नाराज होकर ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया। कड़ाके की ठंड में वे बिना कपड़ों के नहर किनारे केवल एक कंबल बिछाकर धरने पर बैठ गए। उनका साफ कहना है कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
अंबेडकर सर्किल से इंदिरा कॉलोनी तक बदहाली
दरअसल, अंबेडकर सर्किल से इंदिरा कॉलोनी तक जाने वाली नहर लंबे समय से गंदगी और सीवरेज से भरी पड़ी है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बदबू, मच्छर और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से न तो नियमित सफाई करवाई गई और न ही नहर को ढकने का काम शुरू हुआ। ऐसे में बार-बार शिकायतों के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो कमलेश वैष्णव ने यह कठोर तरीका अपनाया।
पोस्टरों के जरिए उठाए तीखे सवाल
धरने के दौरान कमलेश वैष्णव ने दो पोस्टर भी लगाए हैं। इन पोस्टरों में नगर निगम की कथित दोहरी नीति पर सवाल उठाए गए हैं। एक पोस्टर में आरोप लगाया गया है कि पाली के धन्ना सेठों को खुश करते-करते नगर निगम पर करीब 40 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है। वहीं, दूसरे पोस्टर में कैफे और वीआईपी इलाकों के लिए पक्की नजर और आम जनता के लिए कचरे से भरी नहर की तुलना की गई है। इन नारों ने राहगीरों और स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है।
गरीबों की आवाज बनकर उभरे कमलेश
कमलेश वैष्णव का कहना है कि शहर में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा सीवरेज समस्या से परेशान हैं। लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसके उलट, प्रभावशाली लोगों के मामलों में अधिकारी तुरंत हरकत में आ जाते हैं। इसी असमानता के खिलाफ वे यह प्रतीकात्मक लेकिन बेहद सख्त विरोध कर रहे हैं।
समाधान तक जारी रहेगा आंदोलन
कमलेश वैष्णव ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी मांग बहुत सीधी है। नहर की पूरी तरह सफाई करवाई जाए और उसे ढकने का काम जल्द शुरू किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे धरने से नहीं उठेंगे। फिलहाल यह अनोखा विरोध पाली ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बन गया है और नगर निगम पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
