क्या 80,000 रुपये तक आ सकता है सोना? किस आधार पर लग रहे हैं ये अनुमान

Gold bars and price chart showing possible fall to 80000 rupees in India
वैश्विक हालात बदलने पर 80 हजार रुपये तक आ सकता है सोना

क्यों बनी ‘रॉकेट’ जैसी रफ्तार?

पिछले महीनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। विश्लेषकों के मुताबिक इसके पीछे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बड़ी वजह रही।इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने जमकर खरीदारी की।खासतौर पर BRICS देशों ने बड़ा दांव खेला।ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर वैश्विक खरीद का लगभग 50% हिस्सा खरीदा।इन देशों की रणनीति अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना थी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी। नतीजा, कीमतें आसमान छूने लगीं।

🇷🇺 रूस की रणनीति बदली तो क्या होगा?

अब चर्चा इस बात की है कि रूस अपनी रणनीति बदल सकता है। अमेरिका के साथ तनाव के चलते रूस ने डॉलर से दूरी बनाई थी। उसने सोने का भंडार तेजी से बढ़ाया। लेकिन हालिया संकेत बताते हैं कि रूस फिर से डॉलर का उपयोग बढ़ा सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो वह अपने सोने के भंडार की बिक्री कर सकता है। अगर बाजार में अचानक भारी आपूर्ति आई, तो कीमतों पर दबाव बनना तय है।

युद्ध खत्म हुआ तो असर तय

रूस-यूक्रेन युद्ध भी एक अहम फैक्टर है। इतिहास गवाह है कि संकट में सोना चमकता है। लेकिन शांति आते ही इसकी चमक फीकी पड़ती है। अगर कूटनीतिक समाधान निकलता है, तो बाजार से अनिश्चितता खत्म होगी। ऐसी स्थिति में निवेशक जोखिम वाले और अन्य एसेट्स की ओर लौट सकते हैं।

70-80 हजार तक गिरावट का अनुमान

रिपोर्ट्स के अनुसार Bloomberg ने अनुमान जताया है कि भारत में सोना 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट अचानक नहीं होगी। बल्कि धीरे-धीरे वैश्विक परिस्थितियों के बदलने के साथ आएगी। अनुमान है कि 2027 के अंत तक कीमतें 80,000 रुपये के आसपास स्थिर हो सकती हैं।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं। सोना वैश्विक संकट से सबसे पहले प्रभावित होता है। अगर डॉलर मजबूत होता है, और युद्ध खत्म होता है, nतो गिरावट संभव है। लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोने की चमक फिर तेज हो सकती है। इसलिए आम खरीदारों को सावधानी से कदम उठाना चाहिए। बाजार की दिशा समझकर ही खरीदारी करनी चाहिए।

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