शंकराचार्य विवाद पर बड़ा फैसला, GST डिप्टी कमिश्नर का इस्तीफा

GST deputy commissioner resignation over Shankaracharya controversy
शंकराचार्य विवाद के बीच जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का इस्तीफा

मुख्यमंत्री योगी पर टिप्पणी से आहत अधिकारी ने छोड़ी सरकारी सेवा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। जीएसटी विभाग में उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) पद पर तैनात प्रशांत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई हालिया टिप्पणियों से वे गहराई से आहत हैं। उनके अनुसार, इस तरह की भाषा उनके आत्मसम्मान के विपरीत है और ऐसी स्थिति में सरकारी सेवा में बने रहना उन्हें उचित नहीं लगा।

इस्तीफे के पीछे भावनात्मक पीड़ा

प्रशांत सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक संन्यासी और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। शंकराचार्य जैसे उच्च धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति से मर्यादित और संयमित भाषा की अपेक्षा की जाती है। लेकिन हालिया बयानों ने उन्हें मानसिक रूप से आहत किया। एक लोक सेवक होने के बावजूद वे अपने आदर्श के अपमान को अनदेखा नहीं कर सके।

शंकराचार्य और सरकार के बीच बढ़ा विवाद

पिछले कुछ दिनों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रयागराज माघ मेले से जुड़े घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री और प्रशासन पर तीखी टिप्पणियां की थीं। प्रशांत सिंह का मानना है कि इन बयानों में मर्यादा की कमी रही, जिससे समाज और प्रशासन से जुड़े लोग असहज महसूस कर रहे हैं।

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज

डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी के इस्तीफे से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर तीखी बहस चल रही है। कुछ लोग इसे नैतिक साहस का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सेवा नियमों के लिहाज से असामान्य कदम मान रहे हैं। धार्मिक टिप्पणी के विरोध में किसी वरिष्ठ अधिकारी का पद छोड़ना प्रशासनिक इतिहास में एक अलग मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे से तुलना

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ दिन पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दिया था। हालांकि दोनों मामलों के कारण अलग हैं। अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून और शंकराचार्य के शिष्यों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया था, जबकि प्रशांत सिंह का इस्तीफा मुख्यमंत्री के खिलाफ टिप्पणियों से जुड़ा है। एक ही सप्ताह में दो वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे ने प्रदेश की नौकरशाही में वैचारिक मतभेदों को उजागर कर दिया है।

शासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में सरकार समीक्षा और संवाद का रास्ता अपनाती है। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच के जटिल रिश्तों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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