केसीसी लोन बढ़ाने, फसल बीमा में पारदर्शिता और ऑनलाइन रेवेन्यू रिकॉर्ड को लेकर सरकार को चेतावनी
सपोटरा (करौली)। राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा क्षेत्र में किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय बैठक में किसानों ने खाद की किल्लत, फसल बीमा में अनियमितता और सहकारी समितियों की मनमानी को लेकर तीखा आक्रोश जताया। बैठक में प्रांत उपाध्यक्ष गंगाराम मीणा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि अध्यक्षता जिलाध्यक्ष मोहर सिंह मीणा ने की।
बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि वे आज दोहरी मार झेल रहे हैं—एक ओर मौसम की मार और दूसरी ओर प्रशासनिक उदासीनता। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर सवाल उठाते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि किसानों के खातों से प्रीमियम तो समय पर काट लिया जाता है, लेकिन नुकसान होने पर मुआवजा नहीं मिलता। इससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
किसानों ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा घोषित एक लाख रुपये तक के फसली ऋण के बावजूद सवाई माधोपुर और करौली क्षेत्र में किसानों को मात्र 10 से 30 हजार रुपये का ही ऋण दिया जा रहा है। भारतीय किसान संघ ने मांग की कि केसीसी लोन की सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए।
बैठक में प्रशासनिक खामियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया। किसानों ने बताया कि सपोटरा तहसील के तूरसगपुरा गांव सहित कई क्षेत्रों का रेवेन्यू रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन नहीं हुआ है, जिससे किसान सरकारी योजनाओं से वंचित रह रहे हैं। इसके साथ ही पूरे सीजन में यूरिया खाद की भारी कमी और कालाबाजारी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
किसानों ने हर ग्राम पंचायत स्तर पर गौशाला और नंदी शाला खोलने की भी मांग रखी। बैठक के अंत में भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
