UP में सवर्ण युवकों का मुंडन, बिहार में फांसी की मांग; सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
देशभर में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC के नए नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। इससे विवाद और ज्यादा गंभीर हो गया है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अहम टिप्पणी हुई। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि अदालत को जमीनी हालात की जानकारी है और नियमों की खामियों पर गौर किया जाएगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले को जल्द सूचीबद्ध किया जाएगा।
UP-बिहार में विरोध का उग्र रूप
UGC नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश और बिहार में जबरदस्त विरोध देखने को मिला। यूपी के पीलीभीत में सवर्ण समाज के युवकों ने प्रतीकात्मक विरोध करते हुए मुंडन करा लिया। वहीं बिहार में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोत दी। कई जगह नारेबाजी और प्रदर्शन हुए। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
UGC के नए नियम क्या हैं और विवाद क्यों?
UGC ने 13 जनवरी को ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ को अधिसूचित किया था। इन नियमों के तहत सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ये व्यवस्थाएं मुख्य रूप से SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर नजर रखेंगी।
सरकार का तर्क है कि इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि जनरल कैटेगरी के छात्रों का कहना है कि इन नियमों से उन्हें पहले से ही दोषी मान लिया गया है। उनका आरोप है कि इससे कैंपस में भेदभाव और अराजकता बढ़ सकती है।
संसदीय समिति की भूमिका
इन नियमों की पृष्ठभूमि में संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की सिफारिश अहम मानी जा रही है। इस समिति की अध्यक्षता कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कर रहे हैं। समिति ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी गठित करने की सिफारिश की थी। समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सांसद शामिल थे।
रोहित वेमुला और पायल तड़वी केस से जुड़ा मामला
UGC के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और पुराने मामलों से भी जोड़ा जा रहा है। रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी की आत्महत्याओं ने देशभर में संस्थागत भेदभाव पर बहस छेड़ दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया था। इन्हीं घटनाओं के बाद उच्च शिक्षा में इक्विटी को लेकर दबाव बढ़ा।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि UGC के नियमों में संशोधन होगा या नहीं। फिलहाल देशभर में विरोध जारी है और इस मुद्दे ने सामाजिक व राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
