IIIT इलाहाबाद और टेक वीव्स लैब की साझेदारी से भू-डेटा तकनीक को मिलेगी नई ताकत
प्रयागराज में तकनीकी दुनिया से जुड़ी एक बड़ी और भविष्यवादी पहल सामने आई है। अब जिस जमीन पर लोग चलते हैं, खेती करते हैं और शहर बसाते हैं, वही जमीन डेटा के जरिए अपनी पूरी जानकारी साझा करेगी। इसी दिशा में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) इलाहाबाद और नोएडा स्थित टेक वीव्स लैब के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।
AI और मशीन लर्निंग से बदलेगी भू-डेटा की तस्वीर
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की मदद से भूमि रिकॉर्ड, मानचित्रण, रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक डेटा के उन्नत विश्लेषण पर काम करेंगे। इसके अलावा ड्रोन और सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों को तेज़ी से प्रोसेस कर सटीक परिणाम निकाले जाएंगे। इससे जमीन से जुड़ी जानकारी पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद बनेगी।
समझौते पर हुए अहम हस्ताक्षर
समझौता ज्ञापन पर टेक वीव्स लैब की ओर से निदेशक अंकित मिश्र और IIIT इलाहाबाद की ओर से कुलसचिव प्रो. मंदार सुभाष कार्यकर्ते ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर IIIT के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने और टेक वीव्स लैब के मुख्य तकनीकी अधिकारी राकेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह सहयोग केवल तकनीकी नहीं, बल्कि भविष्य की स्मार्ट प्लानिंग की नींव है।
रिसर्च से सीधे उपयोग तक पहुंचेगी तकनीक
IIIT की एडवांस्ड इमेज एंड डेटा साइंस लैब और टेक वीव्स लैब मिलकर शोध को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाएंगी। डेटा साइंस लैब के प्रभारी डॉ. त्रिलोकी पंत ने बताया कि यह तकनीक जमीन से जुड़े डेटा को समझने और उसका सही उपयोग करने में मददगार होगी।
किसान, योजना और आपदा प्रबंधन को होगा फायदा
इस नई तकनीक से भूमि विवाद कम होंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी। सड़क, मकान और बुनियादी ढांचे की योजना अधिक स्मार्ट बनेगी। किसान यह जान सकेंगे कि कब बुवाई करनी है, कितना पानी देना है और कौन-सी फसल बेहतर रहेगी। इसके साथ ही बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के संकेत समय रहते मिल सकेंगे। जंगल, नदियों और जल संसाधनों की निगरानी भी आसान और प्रभावी हो जाएगी।
