ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों में अचानक नरमी दिखाई देना वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। कुछ हफ्ते पहले तक ट्रंप जिस आक्रामक भाषा में ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे थे, उससे यह संकेत मिल रहा था कि अमेरिका एक बार फिर ‘रेजिम चेंज’ की दिशा में बढ़ सकता है। लेकिन अब उनके सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप को यह अहसास हो गया है कि ईरान, वेनेजुएला जैसा आसान लक्ष्य नहीं है।
पहला बड़ा कारण ईरान का जटिल सत्ता ढांचा है। वेनेजुएला में सत्ता काफी हद तक एक व्यक्ति पर केंद्रित थी, जबकि ईरान में शक्ति सिर्फ सर्वोच्च नेता तक सीमित नहीं है। यहां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), धार्मिक संस्थान और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर सत्ता को संभालती हैं। किसी एक चेहरे को हटाने से पूरा सिस्टम नहीं गिरता।
दूसरा अहम कारण ईरान की मजबूत सैन्य और एयर डिफेंस क्षमता है। रूस और चीन से मिले आधुनिक सिस्टम, साथ ही स्वदेशी Bavar-373 जैसे प्लेटफॉर्म, ईरान को एक मल्टी-लेयर सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। ऐसे में किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जोखिम पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध भड़का सकता है।
तीसरी वजह भौगोलिक और कूटनीतिक सच्चाई है। ईरान रूस और चीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में स्थित है और उसका असर इराक, सीरिया, लेबनान और यमन तक फैला है। ऐसे में सीधा हस्तक्षेप अमेरिका के लिए भारी पड़ सकता है। यही कारण है कि ट्रंप अब ज्यादा सतर्क रणनीति अपनाते दिख रहे हैं।
