गंगापुर सिटी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जल संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता का संदेश देने के उद्देश्य से अर्पण सेवा संस्थान एवं HCL Foundation द्वारा संचालित गतिविधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में नई जागरूकता पैदा की। गंगापुर सिटी ब्लॉक की ग्राम पंचायत श्यारोली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया।
यह पहल प्रदेश सरकार के “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इसके साथ ही “यमुना बेसिन जल संरक्षण एवं पुनर्जीवन परियोजना” के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जल संरक्षण को बनाया जनआंदोलन
कार्यक्रम के दौरान आयोजित सामुदायिक गोष्ठियों में ग्रामीणों को जल संकट की गंभीरता से अवगत कराया गया। साथ ही वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए।
जल संरक्षण अब विकास नहीं, अस्तित्व का प्रश्न
अर्पण सेवा संस्थान के निदेशक (कार्यक्रम) डॉ. चंद्र शेखर मीणा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पृथ्वी और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को याद दिलाने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी चुनौतियां मानव सभ्यता के सामने गंभीर संकट बनकर खड़ी हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब समाज, प्रशासन, समुदाय और कॉर्पोरेट संस्थाएं मिलकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कार्य करती हैं, तभी स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाता है।
पुनर्जीवित जल स्रोत बदल रहे ग्रामीण जीवन
डॉ. मीणा ने बताया कि जल स्रोतों का पुनर्जीवन केवल पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है, आजीविका के नए अवसर विकसित होते हैं और जैव विविधता को भी संरक्षण मिलता है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है।
पर्यावरण संरक्षण सभी की जिम्मेदारी
कार्यक्रम में अर्पण सेवा संस्थान की फील्ड कोऑर्डिनेटर ख्यालो बाई मीणा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों की सुरक्षा, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जब समुदाय स्वयं आगे बढ़कर संरक्षण की जिम्मेदारी निभाता है, तभी पर्यावरणीय प्रयास स्थायी सफलता प्राप्त करते हैं।
ग्रामीणों ने लिया संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर वे भविष्य में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे और अपने गांव को जल संरक्षण के मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रयास करेंगे।
148 लोगों की रही सहभागिता
इस जागरूकता कार्यक्रम में संस्था प्रतिनिधि सियाराम शर्मा, आंगनबाड़ी सहायिका, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित 148 समुदाय सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने जल और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संदेश देते हुए लोगों को दैनिक जीवन में जल के सदुपयोग की शपथ भी दिलाई गई।
