क्विक कॉमर्स सेक्टर में 10 मिनट डिलीवरी को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ गया है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं के बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी प्लेटफॉर्म्स से “10 मिनट में डिलीवरी” का दावा हटा दिया है। इसके साथ ही जोमैटो, स्विगी और जेप्टो जैसी अन्य कंपनियां भी जल्द ही अपने प्रचार और ऐप से इस फीचर को हटाने की तैयारी में हैं।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में इन क्विक कॉमर्स कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक सख्त डिलीवरी टाइम लिमिट डिलीवरी पार्टनर्स के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। तेज डिलीवरी के दबाव में कई बार राइडर्स को जोखिम भरी ड्राइविंग करनी पड़ती है, जिससे सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
सरकार की इस सख्त सलाह के बाद कंपनियों ने भरोसा दिया कि वे अपने विज्ञापनों, सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स से फिक्स्ड टाइम कमिटमेंट हटाएंगी। ब्लिंकिट ने इस दिशा में तुरंत कदम उठाते हुए 10 मिनट डिलीवरी का दावा पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
दरअसल, बीते कुछ महीनों में गिग वर्कर्स यूनियनों ने इस मॉडल के खिलाफ कई बार प्रदर्शन और हड़ताल की थी। उनका कहना था कि अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी सिस्टम डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में डालता है। न्यू ईयर ईव पर हुई स्ट्राइक के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया।
अब कंपनियां यह स्पष्ट कर रही हैं कि डिलीवरी की गति बनी रहेगी, लेकिन किसी तय समय सीमा का दबाव नहीं होगा। इससे उम्मीद की जा रही है कि क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में अब स्पीड के साथ-साथ वर्कर्स की सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
