8 मार्च से 19 अप्रैल तक चलेगा महायज्ञ, 24 करोड़ मंत्र जाप के साथ विश्व शांति और सनातन उत्थान की कामना
8 मार्च से शुरू होगा विराट शत गायत्री महायज्ञ
तीर्थराज पुष्कर में 8 मार्च से 200 कुण्डीय विराट शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान 19 अप्रैल तक लगातार 43 दिनों तक चलेगा। इस महायज्ञ का उद्देश्य विश्वव्यापी आतंकवाद का शमन, हिंदू राष्ट्र निर्माण और संपूर्ण विश्व में शांति की स्थापना करना है।
24 करोड़ गायत्री मंत्रों का होगा जाप
इस महायज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता 24 करोड़ गायत्री मंत्रों का जाप है। स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि एक पुरश्चरण में 24 लाख मंत्रों का जाप होता है। इस प्रकार 100 पुरश्चरण के माध्यम से कुल 24 करोड़ मंत्रों का सामूहिक जाप संपन्न किया जाएगा। यह आयोजन गायत्री शक्तिपीठ मनीवेदिका पीठ पुष्कर में किया जाएगा।
200 यज्ञ कुंड, 2 हजार विद्वान ब्राह्मण होंगे शामिल
महायज्ञ में 200 यज्ञ कुंड स्थापित किए जाएंगे। इनमें 200 ब्राह्मण यजमान के रूप में भाग लेंगे। वहीं, पूरे आयोजन में देशभर से आए लगभग 2 हजार विद्वान ब्राह्मण मंत्रोच्चारण और अनुष्ठानों का संचालन करेंगे। इससे पूरे क्षेत्र में शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।
करौली पहुंचे स्वामी प्रखर महाराज
महायज्ञ के प्रचार और आमंत्रण के तहत स्वामी प्रखर महाराज मंगलवार को करौली पहुंचे। यहां एक मैरिज गार्डन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व भय, अशांति और आतंकवाद से ग्रसित है। सनातन धर्म को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिसका उदाहरण बांग्लादेश में सनातन धर्मियों पर हो रहे अत्याचार हैं।
धर्म विरोधी मानसिकता में आएगा परिवर्तन
स्वामी प्रखर महाराज ने विश्वास जताया कि इस महायज्ञ से उत्पन्न आध्यात्मिक शक्ति से धर्म विरोधी आचरण करने वालों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। यह आयोजन केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के कल्याण की भावना से किया जा रहा है।
ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा पुष्कर
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में महामुनि विश्वामित्र ने भी पुष्कर तीर्थ में शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह आयोजन किया जा रहा है। करौली नगर से मातृशक्ति और ब्राह्मण समाज को यज्ञ दर्शन के लिए आमंत्रित किया गया है।
