राज्यसभा चुनाव 2026 में AIMIM का दांव, RJD की रणनीति पर संकट

बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर महागठबंधन और AIMIM के बीच सियासी हलचल
बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले AIMIM और RJD के बीच सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

बिहार में सियासी हलचल तेज, महागठबंधन की बढ़ी मुश्किलें

पटना। राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पांच सीटों पर होने वाले चुनाव ने सभी दलों की रणनीति बदल दी है। खासकर महागठबंधन के भीतर नई चुनौती खड़ी हो गई है। दरअसल, AIMIM ने राज्यसभा की एक सीट पर दावा ठोक दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने साफ कहा है कि अगर महागठबंधन समझदारी दिखाए तो एक सीट जीती जा सकती है। लेकिन इसके लिए AIMIM को मौका देना होगा। इसके बाद से Rashtriya Janata Dal की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि RJD को AIMIM के पांच विधायकों के समर्थन की उम्मीद थी। अब स्थिति बदलती दिख रही है।

हिना शहाब के नाम पर चर्चा

इधर RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने हिना शहाब को उम्मीदवार बनाने की मांग की थी। माना जा रहा है कि इससे सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, संख्या बल महागठबंधन के पक्ष में नहीं है। वर्तमान में RJD, Indian National Congress और वाम दलों को मिलाकर कुल 35 विधायक हैं। यह संख्या एक सीट जीतने के लिए जरूरी कोटा से कम है। इसलिए बाहरी समर्थन अनिवार्य हो गया है।

NDA की स्थिति मजबूत

वहीं दूसरी ओर National Democratic Alliance की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। बिहार विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक हैं। ऐसे में चार सीटें जीतना लगभग तय माना जा रहा है। पांचवीं सीट पर भी दावा संभव है। हालांकि, NDA के भीतर भी सीट बंटवारे को लेकर खींचतान है। Janata Dal United दो सीटों पर दावा कर रही है। वहीं Bharatiya Janata Party भी अपने 89 विधायकों के आधार पर दो सीटों की दावेदार है।

चुनाव कार्यक्रम घोषित

Election Commission of India ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होगी। 5 मार्च तक नामांकन होगा। 6 मार्च को जांच और 9 मार्च तक नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है। मतदान 16 मार्च को होगा। जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर समेत अन्य नाम शामिल हैं।

क्या करेंगे तेजस्वी यादव?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि Tejashwi Yadav क्या फैसला लेते हैं। अगर AIMIM को साथ लिया जाता है तो समीकरण बदल सकते हैं। लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो विपक्ष की राह और कठिन हो जाएगी। फिलहाल राज्यसभा चुनाव 2026 बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सीट बंटवारे की रणनीति ही तय करेगी कि किसके हाथ कितनी सीटें लगती हैं।

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