पीठ और कमर के दर्द के पीछे छिपे हो सकते हैं खतरनाक संकेत
लगातार रीढ़ दर्द क्यों है चिंता का विषय?
आजकल बड़ी संख्या में लोग रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। शुरुआत में लोग इसे थकान, गलत बैठने की आदत या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब यह दर्द लगातार बना रहे या बार-बार लौटकर आए, तो यह सामान्य नहीं माना जा सकता। खासकर जब दर्द के साथ चलने-फिरने में दिक्कत या शरीर में कमजोरी महसूस हो, तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
किन बीमारियों की ओर इशारा करता है रीढ़ का दर्द?
डॉक्टरों के अनुसार रीढ़ की हड्डी में दर्द कई बीमारियों का लक्षण हो सकता है। इनमें सबसे आम समस्या स्लिप डिस्क है, जिसमें रीढ़ की नसों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा सर्वाइकल और लम्बर स्पोंडिलोसिस में गर्दन और कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रहता है। वहीं ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे रीढ़ में दर्द और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
स्लिप डिस्क क्यों बन जाती है गंभीर?
स्लिप डिस्क की समस्या आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती है। उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की डिस्क का लचीलापन कम हो जाता है। इसके अलावा गलत पोस्चर, भारी वजन उठाना, मोटापा और अचानक गिरने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है। समय पर इलाज न होने पर नसों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे सुन्नपन और पैरालिसिस तक की स्थिति बन सकती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर रीढ़ की हड्डी में दर्द के साथ हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, मांसपेशियों में कमजोरी या चलने में संतुलन बिगड़ रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लंबे समय तक बैठने या झुकने में दर्द होना भी खतरे की घंटी है।
रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ कैसे रखें?
रीढ़ को मजबूत रखने के लिए सही पोस्चर में बैठना और खड़े होना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचें। नियमित योग, हल्की एक्सरसाइज और वॉक करें। भारी वजन उठाने से बचें और वजन को नियंत्रण में रखें। साथ ही, सही गद्दे का इस्तेमाल करें ताकि रीढ़ को पूरा सहारा मिल सके।
